Monday, 16 June 2014

हायकू ..इंतजार.....बारिश



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१-हर्षित मन
मंत्रमुग्ध होती मैं
सोंधी खुशबु|

२--फटी दरारे
खून के आंसू रोता
ठगा किसान|

३--कुपित भानु
असहनीय ताप
आस पावस|

४--दग्ध भाष्कर
आलय तप्त हुआ
तरस खाओ|

५--पावस झुमा
पावन हुई धरा
मग्न किसान| सविता मिश्रा

4 comments:

संजय भास्‍कर said...

बहुत सुन्दर हाइकू .....

संजय भास्‍कर said...

Recent Post शब्दों की मुस्कराहट पर ….अब आंगन में फुदकती गौरैया नजर नहीं आती

सुशील कुमार जोशी said...

बहुत सुंदर ।

Savita Mishra said...

संजय और सुशील भैया बहुत बहुत शुक्रिया आप दोनों का