
बाद में किसी का अता न पता |
आ जाते है लोग नेता कि बातो में,
दे देते है अपना महत्वपूर्ण वोट|
नहीं सोचते वोट देने के बाद होगा क्या,
ये नेता,नेता होंगे या सिर्फ गण |
यमदूत होंगे या सिर्फ यमराज,
न मालूम ये पद पाने के बाद होंगे क्या |
चुनाव में होती है जनता इनका परिवार,
पूरा हिन्दुस्तान ही होता है इनका घर |
पाने के बाद वोट रखते न किसी का ध्यान,
बनाते रहते है अपनी ही बस शान |
लगते देखने में सज्जन बाते भी बड़ी भोली,
पर अंदर से न जाने क्या है ये
सज्जन, दुर्जन या
फिर कुछ और ||
फिर कुछ और ||
+++सविता मिश्रा ++++
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