Wednesday, 1 July 2015

~~पिता लाडली~~

शिखा अपने पड़ोसन अमिता और बच्चो के साथ पार्क में घुमने गयी| चारो बच्चे दौड़ भाग करने में मशगुल हो गये शिखा भी अमिता के साथ गपशप करने लगी । गाशिप करते हुए समय का पता ही ना चला । पता तब चला जब घर पर पहुँच शिखा के पति उमेश का फोन आया ।
शिखा अपने बच्चो को आवाज दी ...."श्रेया मुदित जल्दी आओ घर चलना है|"
दोनों दौड़े दौड़े माँ के पास पहुंचे ही थे कि माँ उनके दोनों हाथो में पार्क के सुंदर-सुंदर फूल देख ठगी सी इधर उधर देखने लगी । कोई पार्क का पहरेदार देख गुस्सा ना करने लगे। तभी अचानक श्रेया से अमिता का बेटा रोहित दौड़ते हुए आते समय भिड़ गया । अमिता जमींन पर गिर गयी जिसके कारण उसके घुटने छिल गये । वह जोर जोर से रोने लगी। शिखा और अमिता दोनों उसे चुप कराने और चोट पर फूंक मारने लगे|
अमिता उसे चुप कराते हुए बोली "बेटा ,देखो तुन्हें चोट लगी तो हम सब को दुःख हुआ इसी तरह तो तुम्हारे फूल तोड़ लेने से पौधे को भी दुःख हुआ होगा न। फूल और पौधा दोनों रोये होंगे ।"
श्रेया भिनक गयी "हमें चोट लगी और आप दोनों को पौधे फूल की पड़ी है ।आप दोनों ही गंदे हो ,पापा से बोलूगी मैं| "
शिखा मुस्कराते हुए बोली "अच्छा बाबा चलो घर बता देना पापा की लाडली| "
शिखा बच्चो के साथ घर आ गयी ।घर में श्रेया पापा को से रो रोकर बताने लगी ।पापा ने मरहम पट्टी करी और उसे संतुष्ट करने के लिय माँ को भी डाँट लगाई| उमेश बात करते करते श्रेया को घर के बाहर ले आये। बाहर खड़े कैक्टस में से एक पत्ती तोड़ "देखो बेटा इसको भी चोट पहुंची न पत्ती और पेड़ के बहते हुए पानी को दिखा बोले । देखो पत्ती और पेड़ दोनों आंसू बहा रहे है न ।"श्रेया समझ गयी की पेड़ पौधो को भी दुःख होता है |
उसने पापा और माँ के सामने संकल्प लिया कि" आइन्दा से कभी किसी पौधे को कष्ट नहीं पहुंचाएगी" ..आगे चलकर वह वनस्पति विज्ञान की बहुत अच्छी प्रोफेसर बनी |......सविता मिश्रा

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