Friday, 12 May 2017

सहयोगी-


अपनी लाड़ली बिटिया की शादी निश्चित न होने की वजह से परेशान सुमन अपने पति से कह उठी, "न जाने लाडली का भाग्य कहाँ सोया है |" भाग्य यह सुनते ही गदगद हो गया|
"वर खोजने के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाना पड़ता हैं ; पर तुम तो पंडितों के बातों में आ जाती थी| घर बैठ कर लड़का थोड़े ही मिल जाता !" कोने में खड़ा कर्म ठठाकर हंस पड़ा|

अब देखो वर खोजने निकला हूँ तो कहीं वर अच्छा मिलता तो घर नहीं, घर अच्छा तो परिवार संस्कारी नहीं | बहुत भटकने पर एक अच्छा लड़का मिला है, परिवार भी बहुत ही सुसंस्कारी हैं| लेकिन वही रहने की समस्या ! अपना घर नहीं है उनके पास| किराए के दो छोटे-छोटे कमरे में रहते हैं सब|
सुनकर भाग्य ने व्यंग दृष्टि कर्म पर डाली |

"क्या अपनी लाडो वहां अडजस्ट कर लेगी ? जितना बड़ा उनका एक कमरा है, उतना बड़ा तो लाडली का स्टडीरुम है !" पति से सारा वितांत सुन सुमन भी चिंतित हो बोल उठी|
सुनते ही भाग्य की स्तिथि देखकर कर्म मुस्करा पड़ा|

"मैं भी सोच रहा हूँ, कैसे रहेगी अपनी लाडो वहां? कहो तो मना कर दूँ ?" पति, सुमन की तरफ प्रश्नवाचक दृष्टी डालते हुए बोला|
यह सुन भाग्य,कर्म की ओर देखकर कुटिल हंसी हंस पड़ा |

"चिंता न करो 'जजमान', रह लेगी और ख़ुशी से रह लेगी |" सुनते ही भाग्य सीना तान खड़ा हो गया|

"पंडित जी बड़े अच्छे मौके पर आए हैं, आपको फोन करने ही वाले थे| कहाँ- कहाँ नहीं गए परन्तु कोई घर-वर सही से न मिल पा रहा है|" पति प्रणाम करता हुआ पंडित जी से बोला|

कर्म शांत था पर भाग्य हँस उठा| भाग्य और कर्म दोनों पति-पत्नी की बातें सुनकर तनातनी कर रहें थे घर के एक कोने में | पंडित जी की आवाज़ पर चुप्पी साध सुनने लगें दोनों |

"अभी तक आप घर बैठे 'हर तरह से अच्छा रिश्ता मिल जाए' चाह रहे थे; इस लिए नहीं मिल रहा था! अब देखिए आप बाहर निकले, खोजे चारों तरफ तो अच्छा रिश्ता मिल ही गया न| भाग्य कितना भी बढ़िया हो पर बिना कर्म के अर्थहीन है और कर्म कितना भी किया जाय पर भाग्य में हो ही न तो कैसे मिलेगा कुछ| बिटिया और इसका होने वाला पति दोनों कर्मशील प्राणी है| कुंडली के हिसाब से इसके भाग्य पर भरोसा रखिए आप! घर को बंगला बनते देर न लगेगी|
यह सुनते ही भाग्य और कर्म दोनों एक दूसरे के गले मिलकर मुस्करा उठे ।

No comments: