Friday, 30 January 2015

~मुहँदेखाई~

बहू के गृहप्रवेश करते ही कानाफूसी शुरू हो गयी - बडे पन्डित बनते है इन्हे यह भी नहीं पता की राहुकाल में नई बहू को गृहप्रवेश नहीं कराते ....भगवान ही मालिक है अब ।
सारे रीतिरिवाज बीत गए ...दादी भी मुँह फुलाये कोने में बैठी थी ।
बहू ने पैर छु आशीर्वाद माँगा ही था कि बरस पड़ी .."राहुकाल में प्रवेश हुआ है छोरी सब अच्छा हो ।" बहू हंस के बोली ये राहुकाल क्या होता है दादी, आप बस हँसते रहा करिये ये हंसी का काल है ।" कह खिलखिला पड़ी | 
दादी उसकी हंसी सुन, 'आजकल की बहुए' कह और मुहं फूला  टीवी पर
समाचार सुनने लगी | जैसे ही पाकिस्तान एम्बेसी से खबर टीवी पर सुनी कि पन्द्रह साल से जेल में बंद रामकृपाल को छोड़ा जा रहा है। दादी की ख़ुशी का ठिकाना न था- "बेटा-बहू, सुनती हो तेरे पिता जी जिन्दाsss  हैं ..।" पति द्वारा दिया  नौलखा  हार हाथो में लिए बोली -"तेरी बहूरिया कहाँ है बुला उसे, उसकी 'मुहँदेखाई' दे दूँ । उसका  प्रवेश बड़ा शुभ हैं। " ...सविता मिश्रा

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