Wednesday, 12 December 2012


२१-मरू तो सुहागन मरू
चाहत है यही
तुम्हारें लिए

२२- राम राम कहते आई
मंदिर में बस
तुम्हारें लिए

२३-स्नान किया गंगा में
पापमुक्ति नहीं बस

तुम्हारें लिए

२४-आभार खेल क्यों खेलेगें
आभार देते हम
तुम्हारें लिए

२५-फायकु का नशा चढ़ा
हर कही दिखा
तुम्हारें लिए

२६-खोयी यादों में तेरी
आंसू बहाती बस
तुम्हारें लिए

२७-जग हँसा बस मैं रोई
ममता जागी बस
तुम्हारें लिए

२८-भैया की लाडली ठहरी
किया सब कुछ
तुम्हारे लिए

२९-पिता के आँखों का तारा
छोड़ा घर उनका
तुम्हारें लिए

३०-माँ के कलेजे का
टुकड़ा सब छोड़ा
तुम्हारें लिए


सविता मिश्रा

2 comments:

dasvaisnaw said...

bahut sunder

Savita Mishra said...

dhanyvaad .......