Saturday, 25 October 2014

~ सुखद क्षण ~

सुखद क्षण
=======
बच्चे को सड़क पर लोटते देख शीला ठहर गई | बगल ही खड़ी माँ से पूछने पर पता चला बच्चा दीपावली पर पटाखे लेने को मचल रहा था| औरत के पास इतने पैसे ना थे कि वह पूजा के लिय लक्ष्मी-गणेश, बताशे लेने के बाद उसे पटाखे भी दिला
सकें | जिद्द में आ बच्चा वही पानी में लोट गया| शीला ने अपने बेटे के लिए खरीदें पटाखे में से कुछ उसे दें दिए| वह खुश हो गया, पर शीला का बेटा रोने लगा|
उसे चुप करातें हुए ठण्ड से कांपता बच्चा बोला- "तू भी लोट जा यहाँ, फिर तेरी मम्मी तुझे और ज्यादा पटाखे दिलाएगी |"

4 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

सुंदर ।

Digamber Naswa said...

गहरा भाव छुपा है इस मासूम सी कहानी में ...

vibha rani Shrivastava said...

स्नेहाशीष .... असीम शुभकामनायें ....

pbchaturvedi प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

बेहद उम्दा और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
नयी पोस्ट@आंधियाँ भी चले और दिया भी जले

नयी पोस्ट@श्री रामदरश मिश्र जी की एक कविता/कंचनलता चतुर्वेदी