Monday, 22 October 2012

सस्ता हुआ आदमी


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सस्ता हुआ बस आदमी
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सब कुछ महँगा हुआ है
सस्ता हुआ है तो बस आदमी|
आदमी का कल-पुर्जा हुआ महँगा
सस्ता हुआ है तो बस आदमी|
खून दो सौ से चार सौ में ब्लैक होता है
डोनर तो अक्सर यहाँ पर हैक होता है |
किडनी लाख दो लाख में भी न मिलती है
आँखों की कीमत कानों को बहुत खलती है|
दिल भी यहाँ अनमोल हो बिक जाता है
मोलतौल सुनकर दिमाग पंगु हो जाता है |
कोई भी अंग शरीर का लगवाने चलो तो
तीन-चार लाख खर्च करना ही पड़ता है|
परन्तु यदि कुछ सस्ता हुआ है
तो वह है जान-ए-ईमान आदमी |

कौड़ियो के भाव में बिक जाता है
दस रुपये के तेजाब से मिट जाता है|
बीस रुपये के मिट्टी के तेल से जल जाता है
दो रुपये के लिए भी मर मिट वह जाता है|

सब कुछ बहुत महँगा हुआ है,
सस्ता हुआ है तो बस आदमी||
दाल-चावल, साबुन-तेल
दवा-दारू,बाजारू खेल|
और तो और सिर छुपाने का
ठिकाना हुआ बहुत ही महँगा|

यहाँ तक कि पानी भी हुआ अनमोल
सस्ता हुआ है तो बस एक आम आदमी|


आदमी के इर्द-गिर्द घुमती
हर चीज ही तो हुई है महँगी|
परन्तु सस्ता यदि कुछ हुआ है
तो वह है बस चमड़ा-ए-आदमी||
== सविता मिश्रा ==

4 comments:

Guru said...

कौड़ीयों के भाव में बिक जाता है ,
दस रुपये के तेजाब से मिट जाता है ,
बीस रुपये के मिट्टी के तेल से जल जाता है ,
दो रुपये के लिए भी मर मिट जाता है |

सब कुछ मंहगा हुआ है ,
सस्ता हुआ है तो बस आदमी ||

ए० के० दुबे said...

सुन्दर ..पंक्तियाँ

Savita Mishra said...

dhanyvaad guruji .............

Savita Mishra said...

dhanyvaad guruji .........