Sunday, 28 October 2012

~ जिंदगी ~

जिंदगी
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ओ जिन्दगी तेरे नखरे
सहते सहते जब थक जायेगें
यूँ कुछ कर गुजर जायेगें
कि तुम अवाक स्तब्ध रह जाएगी
फिर भूले से भी हमें ना रुलायेगी ...सविता मिश्रा

5 comments:

Bindass Post said...

बहुत खूब /////
कुछ पल इधर हमारे website पे भी ....
http://bindasspost.blogspot.in/
thankssssssssssss

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर...

Savita Mishra said...

कैलाश भैया नमस्ते ......आभार

Savita Mishra said...

बिंदास जी आभार आपका

Upasna Siag said...

bahut badhiya ...