Friday, 30 November 2012

++माँ तो आखिर माँ होती है ++





नौ महीने तक हम तुझे,
कोख में छुपा के चले ,
दो वर्ष तक तो हम तुझे ,
गोद में उठा के चले ,
डेढ़ से दो वर्ष तो हम तेरी ,
हर अनकही को भी समझे|

फिर तेरी माँ की बस,
बोली सुन के हर्षे |
तेरे पहले कदम पर भी ,
हम ही बच्चे बन के उछले,
तेरे भूख प्यास कों भी समझे,
तेरे हर चाल ढाल कों समझे ,
तेरे हर प्रयत्न को शाबासी हम दिये,
सीख जायें तू तब तक उत्साहित तुझे किये|

पढ़ना लिखना तुझे सिखायें ,
चलना सही डगर बतायें ,
डगमगायें ना कही तू ,
हम हर समय सहारा बन तेरा रहे ,
और आज तू जब बड़ा हो गया ,
हमें ही तू अपना बोझ कह गया |

बुढ़ापा जब हमारा लगा आने,
तब एक भी दिन हम
तुझे लगे भारी लगने ,
पिछला सब कुछ भूल तुने ,
लगा अब तो दूसरों की है सुनने,
माँ तुझे अब लगी है खलने ,
हम से ही चला अपना पिंड छुड़ाने ,

छोड़ आया तू हमें ही वीराने,
माँ कहने में भी अब लगी तुझे शर्म आने |

फिर भी मैं तो माँ हूँ तेरी ,
तुझे लग जायें यह दुआ मेरी ,
तेरे बच्चे ना करे यह गत तेरी ,
पलकों पर रखे आदर करे सदा तेरी ||

|| सविता मिश्रा ||

4 comments:

Savita Mishra said...

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=387884317916496&set=a.609248962446696.1073741833.100000847946357&type=1&comment_id=817661331605457&ref=notif&notif_t=comment_mention

सुशील कुमार जोशी said...

माँ माँ होती है ।

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर और सटीक...माँ सिर्फ़ माँ होती है..

सुरेश मिश्र said...

लाजवाब ......