
दुखी हो रुदन ही करते रहे|
अपनों से लगे अपने घाव को
अपने ही आंसुओ से धोते रहे|
पर घाव थे कहा बाहरी हुए
वह तो दिल पर थे किये हुए|
आंसुओ ने धोया तो नहीं
और भी गहरा कर दिया|
गुस्सा भी था मन में बहुत
क्यों कर दिल से लगा लिया|
क्यों कुछ अधिक हमने
उनसे अपनापन जताया|
क्या अपने ऐसे होते है
बात बे बात दिल पर घाव देते है| .....
सविता मिश्र
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