Sunday, 4 November 2012

++क्यों तुम बिना मिले ही चले गये++



क्यों तुम?
बिना मिले ही चले गये
तुम्हारी !
वही चिरपरिचित आवाज
वही भीनी भीनी सी खुशबु
तुम आये...
और बिना मिले चले गये
मेज पर बिखरा था जो सामान
सलीके से सजा मिला
चादर तकिया ..
सब यथा स्थान मिला
तुम आये !
और बिना बोले चले गये
मैं सोती रह गयी!
उठाया भी नही
मुझसे तुमने !
चाय भी नहीं बनवाई
उठी जब!
घर के हर कोने में तुमको ढूढा
पर तुम हमको मिले नहीं कही
क्या था इतना जरुरी काम
कर ना सके!
मेरे जगने का भी इंतजार
तुम आये और ...
बिना बोले चले गये
अब मैं फिर करती रहूँ....
तुम्हारा इन्तजार

कब आओगे !
बता देना हमको इस बार
जागती रहूंगी!
सारी रात नहीं सोउगी
आना अब की बार....
बैठ खूब बतियाऊगी

इस बार की गलती...
फिर ना दोहराउगी......सविता मिश्रा

1 comment:

Savita Mishra said...

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=440791775959083&set=a.609248962446696.1073741833.100000847946357&type=3&src=https%3A%2F%2Ffbcdn-sphotos-e-a.akamaihd.net%2Fhphotos-ak-xaf1%2Ft31.0-8%2F194423_440791775959083_1561515518_o.jpg&smallsrc=https%3A%2F%2Ffbcdn-sphotos-e-a.akamaihd.net%2Fhphotos-ak-xpa1%2Fv%2Ft1.0-9%2F250216_440791775959083_1561515518_n.jpg%3Foh%3D1fbb908e8f1ff3539eb3f2b6816325f0%26oe%3D55116DC3%26__gda__%3D1426958768_593c6b7a0a6c2ba9fc1cc53b675e3ba8&size=912%2C1216