Thursday, 12 February 2015

~~बेकदरी का डर ~~

रीना , ऋतू को एक फ्लावर पाट टूट जाने पर मारते-मारते गलियारे में आ गयी |
दो पड़ोसी महिलायें धूप सेंक रही थी वही | यह देख फुसफुसाने लगी आपस में |
पहली महिला- "बाँझ है न क्या समझेगी कोख का दर्द, बच्चे की ममता |"
दूसरी महिला -"लेकिन वह तो ऋतू की माँ है न, तो बाँझ ...."
पहली महिला -"नहीं रे वह प्रेगनेंसी का झूठ बोल बनारस चली गयी थी | वही का जन्म बताती रही परिवार वालो से | वह तो मेरे दूर के रिश्तेदार ने बताया कि ऋतू इसकी ममेरी बहन की बेटी है | जिसे मरते-वक्त वह एक महीने की ऋतू को इसकी गोद में डाल गयी थी| इसने परिस्थितियों का फायदा उठाया और दो साल बाद जब आई तो सभी से खुद को ऋतू की माँ बताने लगी| जैसे सास की नजरों में उठ जाये| इसकी जेठानी को भी कोई औलाद नहीं है , उसकी बेकदरी यह देख ही रही थी |"
दूसरी महिला- "तो तुमने इसकी सास से खुलासा नहीं किया ?"
पहली महिला -" नहीं , क्यों खुलासा कर इसका जीवन नरक बनाऊं, यही सोच चुप हूँ | सास-जेठानी का गुस्सा इस पर उतारती भले है , पर प्यार भी खूब करती है, ऋतू को खिलाये बगैर एक दाना भी मुहं में नहीं डालती |"
.दूसरी महिला - "आखिर माँ जो है | देखो अब आंसू बहाते हुये मलहम लगा रही है ।"
पहली महिला - कह रही थी मैं न , बहूत प्यार करती है। जान छिड़कती है जान । तभी तो राज फास नहीं कर रही। वर्ना खूसट सास अनाथ ऋतू का जीना हराम कर देंगी इसके साथ-साथ। ........सविता मिश्रा

2 comments:

Shiv Raj Sharma said...

कुछ लघु कहानियां पढ़ी । बहुत अच्छी लगी ।

Shiv Raj Sharma said...

कुछ लघु कहानियां पढ़ी । बहुत अच्छी लगी ।