Monday, 9 February 2015

~~हुनर~~

"वाह ! क्या गजब की हारमोनियम बजाते हो बेटा| कहाँ से सिखा ?"
कोई जबाब नहीं |
"किस कक्षा में पढ़ते हो |"
कोई जबाब नहीं ..|
तभी एक बूढ़ा सा व्यक्ति आकर उसे उठाने लगा |
"ये बच्चा जबाब क्यों नहीं दे रहा |"
"बेटा ये गूंगा-बहरा है| भगवान ने कमियाँ सारी दी है, पर ये हुनर दे दिया है| जिससे भरण-पोषण हो रहा है | ले-देके ये बूढ़ा दादा ही अब इसका सहारा है|"
"इसके पिता ..."
"वह एक हादसे का शिकार हो गया | मरते समय उसने, इसकी हथेली को छूकर ना जाने क्या किया कि 'हारमोनियम' पर हाथ रखते ही 'सातो सुर' गुंजायमान हो गये | सविता मिश्रा

1 comment:

बालकिशन श॔र्मा said...

मर्मस्पर्शी.......!